
Awara Atma
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About the Book
कविता चंद पंक्तियों में लिखी गई एक व्यापक गाथा होती है। पूरी एक घटना की, भावना, जीवन दर्शन की दास्ताँ छुपी होती है।
कविता सरल होते हुए भी सहज रूप से समझ आ जाए तो वह एक सफल कविता हो जाती है।
कविता में पंख होते हैं कवि को उड़ाकर जाने कहाँ ले जाते हैं।
कविता में माधुर्य न हो तो वह शुष्क-सी लगती है, अतः
कविता चंद पंक्तियों में लिखी गई एक व्यापक गाथा होती है। पूरी एक घटना की, भावना, जीवन दर्शन की दास्ताँ छुपी होती है।
कविता सरल होते हुए भी सहज रूप से समझ आ जाए तो वह एक सफल कविता हो जाती है।
कविता में पंख होते हैं कवि को उड़ाकर जाने कहाँ ले जाते हैं।
कविता में माधुर्य न हो तो वह शुष्क-सी लगती है, अतः माधुर्य कविता का अनोखा गुण है, जो अनेक कविताओं में दिखाई देता है।
कविता उन जिन्दा दिल लोगों की भाँति बिंदास भी बन जाती है जब वह उनकी अभिव्यक्ति करती है। जैसे मेरे संग्रह में निहित कविता ‘जिंदगी को खेल समझ’ में दिखाई देता है।
कविता में जाने कितनी रातें अपना राज छिपाती हैं। ‘रात गम की भारी’ इस बात को दर्शाती है।
कविता हमारे एहसासों का विश्वास होती है ये एहसास हमसे बात करते हैं। इस भाव को “करो मुझसे बात” में मैंने दर्शाया है।
“खुद को श्रेष्ठ” कविता कुछ अहंवादी लोगों की अभिव्यक्ति करती है।
अंधेरे का तिलिस्म बिखेरती कविता ‘शाम होने को है।’ शाम के समय का बड़ा वास्तविक वर्णन हुआ है। युवा मन की आतुरता जैसी शाम सब ओर सन्नाटे को रूप में फैल जाती है।
“रिश्तों की मौत” कविता में समाज की उस स्थिति की सच्चाई है कि लोगों के लिए रिश्ते निभाना किसी मौत की दुर्गम गुफा में घुसने जैसा हो गया है। फिर भी कवयित्री ने इसे कोमल फूलों जैसा संवारने का संदेश दिया है।
बंजर भूमि की समानता एक बुझे हुए मन से की है। “धरती बंजर” कविता में ऊँचे-ऊँचे गुंबद और मीनारों वाली इमारतों की मनःस्थिति का वर्णन है, कि वो शहरों से दूर कितनी अकेली है। ‘किया किनारे खड़ा।’
कविता में उपभोक्ता संस्कृति ने कुछ लोगों को बहुत अमीर (रईस) बना दिया है। सामान बहुतायत में बिक रहा है निश्चित रूप से वो अमीर तो होंगे ही...। “तुम्हारी रईसी” कविता इसी सच्चाई की सूचक है।
कस्तूरी मृग का मन जिस उपवन में लग गया है उसे वहाँ से दूर जाना है, वह व्यथित है, कविता ‘इस उपवन में जीने दो’ में उस मृग की भावना व्यक्त हुई है।
‘जिंदगी को खेल समझ’ कविता उनपर आधारित है जो जिंदगी में बहुत कुछ पाने के बाद अब जिंदगी को हल्के में लेकर खेल रहे हैं।
कवयित्री ने स्त्री के सौन्दर्य से प्रेरित होकर ‘हंसनी’ कविता में उसकी सुन्दर अभिव्यक्ति की है।
जो हंसनी बनकर हिरणों के झुंड में आ गई उसे शामों की तरह जलना भी आता है।
‘मौसम की दुहाई’ कविता में कवयित्री ने मौसम के हजार नखरे और मौसम की मादकता का वर्णन किया है।
मेरे प्रिय पाठक गण मैं जो कुछ सोचती हूँ, देखती हूँ, उसे अपने शब्दों में अभिव्यक्त करती हूँ। शायद कभी-कभी कहीं-कहीं मेरी तरह आप भी सोचते होंगे, महसूस करते होंगे।
कवि का नज़रिया उसके सोचने का ढंग होता है। उसी में वो जीता है। किसी को सुख देने का नज़रिया भी हो सकता है—प्रेरणादायी नज़रिया। “नज़रिया” कविता में।
मीत से कई बातें, करने को जी चाहता है पर उसे और कई तितलियाँ अपनी ओर खींचकर ले जाती हैं तो बेबस बुझे मन से ‘गीत अनसुने’ कविता बन पड़ती है।
इसी तरह अनेक कविताओं का खजाना है मेरी इस किताब में आपको अच्छा लगेगा पढ़कर और मुझे भी अच्छा लगेगा।
मेरा मन ही मेरी आत्मा है जो मुझे जाने कहाँ-कहाँ ले जाते हैं और मैं उनके साथ उड़ जाती हूँ। अपने तन से दूर अपनी आत्मा बन उड़ जाती हूँ यहाँ-वहाँ जाने कहाँ-कहाँ।
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- Paperback
- eBook








