
Khwaahishon Ki Kitab
Kavita Sanghrah
About the Book
मन के अनमोन भावों के खजाने से भरा यह “ख़्वाहिशों की किताब” कविता संग्रह जग के सामने प्रस्तुत कर रही हूँ। आप सबको खुद से परिचित कराना चाहती हूँ।
मेरे प्रिय पाठकों मुझे पढ़ने वाले, सुनने वाले, मुझे जानने वाले मेरी किताब “सुलगती खामोशियाँ” मेरी पहली किताब है। कविताओं की किताब है। कविताओं की किताब, मेरी
मन के अनमोन भावों के खजाने से भरा यह “ख़्वाहिशों की किताब” कविता संग्रह जग के सामने प्रस्तुत कर रही हूँ। आप सबको खुद से परिचित कराना चाहती हूँ।
मेरे प्रिय पाठकों मुझे पढ़ने वाले, सुनने वाले, मुझे जानने वाले मेरी किताब “सुलगती खामोशियाँ” मेरी पहली किताब है। कविताओं की किताब है। कविताओं की किताब, मेरी कम उम्र की भावनाओं की झलक है मेरी भाषा की सरलता धीरे-धीरे उसमें विस्तार होता गया, भावनाओं का रूप विकसित होता गया।
समय के साथ-साथ कविताओं में घटना, रहस्य, कहानी देशकाल की परिस्थितियों की झलक समाहित होती जाती है और कविता विकसित होती जाती है।
मेरे इस संग्रह में मेरे ऐसे जज़्बात हैं, जिनमें ज़माने की अनेक रहस्यपूर्ण अनुभूतियों का मंजर है जैसे लहरों में डूबते हुए साथी को पाने की अनुभूति है, उस अबोध मासूम को देखना जिसने अपनी मासूमियत में जाने कितना कुछ छिपा रखा है।
जिन्हें कल्पनाओं से ज्यादा मिल जाता है वो सुख कितना अद्भुत होता है।
आज के दौर में एक रुपए की हस्ती है तो सही पर बड़ी मामूली। “तेरे उपवन को” कविता किसी की मजबूरी का इतना बड़ा कारण भी बन सकती है... ? कि उसे झेलने वाला भला क्या बतायेगा। जैसे किसी के कारण बन्द कमरे का कैदी।
आज के दौर में छोटे-छोटे से एहसासों में बड़े-बड़े अरमानों का फसाना छिपा होता है, जिसे कोई कह सकता है, कोई नहीं कह सकता पर भावुक तो हो जाता है।
नाखुदा रहनुमाओं के दामन में पहुँचकर एक मेहरबाँ का क्या हाल हो जाता है उसे अपनी वफाओं का सिला जो मिलता है वो मेरी “नाखुदा” कविता में निहित है।
सुखों की जिद में इंसान तन्मय रहता है। सदा रहता है।
“हँसी दास्ताँ हमारी” कविता एक विख्यात प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसमें एक महान गायिका और एक महान संगीतकार का क्षणिक-सा दार्शनिक प्रेम भाव दर्शाया है।
आज के ज़माने की ही बात है कि हम सबकी नींदों पर कब्जा कर लिया है कुछ आधुनिकता की देन ने, मोबाईल ने “भावों के पुजारी” कविता एक भक्ति पूर्ण कविता है। इसमें ईश्वर भी हमारे लिए हमारी तरह आस्तिक बन जाते हैं। भला ईश्वर को कोई नकार सकता है?
एक शायर की तरह कम से कम पंक्तियों में मन में अनुभूतियों को जगाने का प्रयास किया है। लोगों के पास समय की कमी होती है अतः छोटी से छोटी कविता पढ़कर किसी के जीवन की बड़ी से बड़ी गाथा का आभास हो जाए तो अच्छा ही है।
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