
Dard Ke Dariya
About the Book
“जन्मों के रिश्ते” कविता में हमारा जीवन कितने रिश्तों में बंधा हुआ है, जाने कितने लोगों की सांवेदनओं का परिणाम हैं, हमारा जीवन ऐसा कवयित्री ने दर्शाया है।
कवयित्री ने उन बेरहम परछाईयों वाले शहरों से बचने का संदेश दिया है जाहाँ आकर अंधेरे के साये में खूँखार सायों से घिर जाते हैं । हम लोग, उनसे बच के
“जन्मों के रिश्ते” कविता में हमारा जीवन कितने रिश्तों में बंधा हुआ है, जाने कितने लोगों की सांवेदनओं का परिणाम हैं, हमारा जीवन ऐसा कवयित्री ने दर्शाया है।
कवयित्री ने उन बेरहम परछाईयों वाले शहरों से बचने का संदेश दिया है जाहाँ आकर अंधेरे के साये में खूँखार सायों से घिर जाते हैं । हम लोग, उनसे बच के जायें कौँहा .......... ?
इन्सानों को कवयित्री ने हाड़-माँस का पुतला भी कहा है वह भी संग्राम करके जी रहा है और उतार-चढ़ाव के साथ चल रहा है।
“सदी की इनायत” कविता में उन लोगों को खुशनसीब बताया है जो लोग एक सदी से दूसरी सदी में आ गये।
चाहत की असीम अवस्था को प्रकट करते हुए कवयित्री वफा का सबूत देना जरूरी मानती है।
““फुर्सत” कविता में उन क्षणों को याद करते हुए भावना का अतिरेक हो जाता है जब लुटने के बाद सब याद आता है। होश आता है। फुर्सत मिलती है। जमाने का रंजों गम क्या कर गुजर गया।
“जन्मों के रिश्ते” कविता में हमारा जीवन कितने रिश्तों में बंधा हुआ है, जाने कितने लोगों की संवेदनाओं का परिणाम हैं, हमारा जीवन ऐसा कवयित्री ने दर्शाया है।
कवयित्री ने उन बेरहम परछाईयों वाले शहरों से बचने का संदेश दिया है जहाँ आकर अंधेरे के साये में खूँखार सायों से घिर जाते हैं। हम लोग, उनसे बच के जायें कहाँ .......... ?
इन्सानों को कवयित्री ने हाड़-माँस का पुतला भी कहा है वह भी संग्राम करके जी रहा है और उतार-चढ़ाव के साथ चल रहा है।
“सदी की इनायत” कविता में उन लोगों को खुशनसीब बताया है जो लोग एक सदी से दूसरी सदी में आ गये।
चाहत की असीम अवस्था को प्रकट करते हुए कवयित्री वफा का सबूत देना जरूरी मानती है।
“फुर्सत” कविता में उन क्षणों को याद करते हुए भावना का अतिरेक हो जाता है जब लुटने के बाद सब याद आता है। होश आता है। फुर्सत मिलती है। जमाने का रंज-ओ-ग़म क्या कर गुजर गया।
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