
Dharti Dhara ka Chakra
Kavya Sangrah
About the Book
सुनहरी धूप के साये में माधुर्य का मिलन ठंडी बयार कविता बन जाती है। बहती धार में कश्ती को लेकर निकल जाओ डूबने का डर न सताये। कवि का मन ही ऐसा हो सकता है। कवि के पंख नहीं दिखाई देते पर उसके पंख उसे आसमान तक ले जाते हैं। उसके साथ अनेक भावनात्मक चमत्कार होते रहते हैं।
कवि सदैव कुछ ढूँढ़ता रहता है, बीती
सुनहरी धूप के साये में माधुर्य का मिलन ठंडी बयार कविता बन जाती है। बहती धार में कश्ती को लेकर निकल जाओ डूबने का डर न सताये। कवि का मन ही ऐसा हो सकता है। कवि के पंख नहीं दिखाई देते पर उसके पंख उसे आसमान तक ले जाते हैं। उसके साथ अनेक भावनात्मक चमत्कार होते रहते हैं।
कवि सदैव कुछ ढूँढ़ता रहता है, बीती खुशियाँ, बीती घड़ियाँ न जाने क्या-क्या। “सबको फुर्सत” कविता में कवयित्री ने फुर्सत का व्यवहारिक चित्रण किया है।
“बेपरवाह मीत” को भी कवयित्री ढूँढ़ रही है, जिसने उसकी कोई परवाह नहीं की है। जीवन की दास्ताँ जो रोज बदलती है। सपनों की तरह सरल सहज भाषा में बखान किया है।
कवयित्री का मन स्वर्ग पहुँचकर गर्व से परिपूर्ण है। जैसे जन्नत को उनका इंतजार था।
“मन वैराग्य” कविता में कवयित्री हर मनुष्य की जिज्ञासा को महात्मा बुद्ध के समान महसूस करती है।
“चुभन” कविता में नज़रों की चुभन का एक नया अंदाज प्रस्तुत किया है।
अनेक कविताएँ मेरे मन, मेरी भावनाओं का चित्रण हैं। आपको पसन्द आएँगी, चित्त में प्रफुल्लता आयेगी। आपकी खिदमत में पेश है मेरा यह कविता संग्रह।
विश्व में कोरोना का कहर जो तांडव दिखा रहा था उसका चित्रण भी अनेक कविताओं में प्रस्तुत किया है। भय का भयानक विस्तार है अनेक कविताओं में।
कविता शायरी के नज़दीक होती है, कविता मन को सुकून देती है।
कविता में खास तरीके से दिल की बात प्रस्तुत की जाती है।
कविता में सहजता सरलता और किसी घटना का एहसास होता है।
सीमित पंक्तियों में अथाह अनुभूतियों का प्रदर्शन हो जाता है।
अपने जीवन में हम अनेक लोगों से मिलते हैं, अनेक भावनाओं को संजोते जाते हैं, मन को जैसे बहुत सारा खजाना मिल जाता है।
मेरा यह कविता संग्रह भी अनेक ताने-बानों का खजाना है।
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- Paperback
- eBook






