Lata Thakur
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Cover of Dharti Dhara ka Chakra

Dharti Dhara ka Chakra

Kavya Sangrah

4.5 out of 5(120 reviews)

About the Book

सुनहरी धूप के साये में माधुर्य का मिलन ठंडी बयार कविता बन जाती है। बहती धार में कश्ती को लेकर निकल जाओ डूबने का डर न सताये। कवि का मन ही ऐसा हो सकता है। कवि के पंख नहीं दिखाई देते पर उसके पंख उसे आसमान तक ले जाते हैं। उसके साथ अनेक भावनात्मक चमत्कार होते रहते हैं।

कवि सदैव कुछ ढूँढ़ता रहता है, बीती

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