
Nyay Nazarband Hai
Kavya Sangrah
About the Book
मेरा यह कविता संग्रह भावनाओं का चलचित्र है। बहुतों का दर्द, बहुतों की चाहत देखी है, अनुभव की है। उन्हीं को समर्पित। अनकही बातें कहने का अधिकार अपनाया है। कितनी ही गुज़ारिशों में हम जीते हैं। फिर उन्हीं बेताबियों में चैन ढूँढ लेते हैं। कभी हमें बहुत कुछ दिखाई देता है और कभी हम खुद तक ही सीमित होते है
मेरा यह कविता संग्रह भावनाओं का चलचित्र है। बहुतों का दर्द, बहुतों की चाहत देखी है, अनुभव की है। उन्हीं को समर्पित। अनकही बातें कहने का अधिकार अपनाया है। कितनी ही गुज़ारिशों में हम जीते हैं। फिर उन्हीं बेताबियों में चैन ढूँढ लेते हैं। कभी हमें बहुत कुछ दिखाई देता है और कभी हम खुद तक ही सीमित होते हैं। उन्हीं समस्याओं की दास्ताँ है ये कविता संग्रह है।
मौसम की सुहानी अनुभूति ही दिल के तारों को झनकार देती है, मुस्कान देती है। जीवन में फैली अनगिनत असमानताएँ और समस्याएँ झकझोर कर रख देती हैं...तब सुख देने वाली, मन की ज़ुबान से गायी गई ये कविताएँ ही मन को राहत देती हैं।
दुनिया का राग हर कोई गाता है। कोई किसी की नहीं सुनता...फिर हम ढूँढते हैं सुकून...शायद कुछ पलों का सच्चा सुकून, आपको मेरी इन कविताओं में मिलेगा।
मेरी कविता “हवेली की दीवारों से” ऐसी न जाने कितनी जगह होंगी जहाँ के गलियारों में ये मन उन्माद में डूब कर प्रेम गीत का आलाप करने लगता है।
इसके विपरीत “युग के गलियारों से” कवि हृदय को उन देश भक्तों की आवाज़ सुनाई देती है जो झूल गए फाँसी के फंदों 'पर इस युग के गलियारों में।
“न्याय नज़रबंद है” कविता में हमारे देश की न्याय-व्यवस्था का जटिल, सुरंगी, तरसा-तरसा कर जीने के लिए मजबूर कर देने वाली प्रणाली का प्रदर्शन है।
Available formats
- Paperback
- eBook






