
Vilupt Juguno Ki Chata
About the Book
शब्दों की संरचना भावों के रस में डूबकर कविता की पंक्तियों में सजती जाती हैं। कविता सीमित शब्दों का व्यापार होती है, साहित्य के समाज में अपनी छटा, अपनी आस्था फैलाती हुई सबको विभोर करती जाती है। भाग-दौड़ भरी जिन्दगी के दौर में घटनाएँ, एहसास, संदेश, प्रेरणा सब कुछ दिखता जाता है, जिसे आत्मसात करके कवि अ
शब्दों की संरचना भावों के रस में डूबकर कविता की पंक्तियों में सजती जाती हैं। कविता सीमित शब्दों का व्यापार होती है, साहित्य के समाज में अपनी छटा, अपनी आस्था फैलाती हुई सबको विभोर करती जाती है। भाग-दौड़ भरी जिन्दगी के दौर में घटनाएँ, एहसास, संदेश, प्रेरणा सब कुछ दिखता जाता है, जिसे आत्मसात करके कवि अपनी कलम से सबके लिए कुछ परोसने की तैयारी में लगा रहता है।
समाज में जो आज व्याप्त है वह साहित्य में भी समाहित होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ पढ़े और जानें साहित्य के प्रति मेरी यही आस्था है, जो मैं दे रही हूँ। मेरे काव्य संग्रह में नये भावबोधों का समाहार है। लाचारी में डूबी जिन्दगी का मानवीकरण करते हुए उसके दैन्य रूप का वर्णन किया है...यह मेरा एक प्रयोग है। कविता की विधा में दीनता का साकार साया दिखाया गया है।
शहरों की रातों की खामोशी तोड़ता कुत्तों का स्वर बहुत ही अधिक राहत देता है...जैसे इन शहरों में गुम-सुम से लोगों के बीच कोई सजीव स्वर वाले प्राणी भी साँस लेते हैं, वे अपनी मौजूदगी बयाँ करने में अथक सारी रात अपनी गूँज से हमारी सूनी रात को एक एहसास से भरते हैं।
गुमाँ नहीं, अपनी कमियाँ, विडम्बना आदि अनेकों अनेक कविताएँ हर क्षण के सहते भावों की अभिव्यक्ति है।
“बरसात की बेरहम कहानी” रात को बरसती बरसात प्रेमियों के हृदय की विरह-पीड़ा किस कदर बढ़ा देती है।
“स्वागत से जोखिम तक” कविता उस स्वार्थ पर आधारित है जिसमें स्वागत के बाद मिलने वाले जोखिमों का भार उठाना है।
“साल दर साल” कविता में हर पल की होती खस्ता हालत का वर्णन है। “आईना” जिसमें चेहरा आईना बन जाता है, मन की दशा को छुपा नहीं पाता है।
“मौसम ऋतु” ग्रीष्म ऋतु के तीखे तेवर हैं, मौसम नासाज़ है। मौसम पुरुष है, ऋतु स्त्री है, दोनों के आपसी तीखे प्रहारों से लोगों का बुरा हाल है। फिर सुहाने मौसम ने ऋतु के दामन को ठंडी फुहारों से भर दिया, दोनों का शीतल-लहर-सा मिलन हो गया। इस कविता में। “संग्राम में हलाल” वर्तमान में यूक्रेन के युद्धग्रस्त क्षेत्र का चित्रण है।
“नाबूद-ग़म” कविता में अपने ग़म कम लगते हैं। जब औरों के ग़म देखते हैं तो...। “हर हुई बेनूर” कोई भी बेहद खूबसूरत स्त्री उम्र या बीमारी में किस कदर बेनूर हो सकती है...ऐसा ही चित्रण इस कविता में है।
देश के, दुनिया के, मन के, समाज के अनेकों अनेक प्रामाणिक, सच्चे भावों पर आधारित मेरा यह काव्य-संग्रह है।
Read or Buy
Purchase links coming soon.



